रिमझिम तो है मगर सावन गायब है बच्चे तो हैं मगर बचपन गायब है..!!

"रिमझिम तो है मगर सावन गायब है, बच्चे तो हैं मगर बचपन गायब है..!! क्या हो गयी है तासीर ज़माने की यारों अपने तो हैं मगर अपनापन गायब है ! "

By | 2017-09-09T12:18:39+00:00 September 9th, 2017|Rain-Barish Shayari|0 Comments