मोहबत को जो निभाते हैं उनको मेरा सलाम है

"मोहबत को जो निभाते हैं उनको मेरा सलाम है, और जो बीच रास्ते में छोड़ जाते हैं उनको हुमारा ये पेघाम हैं, “वादा-ए-वफ़ा करो तो फिर खुद को फ़ना करो, वरना खुदा के लिए किसी की ज़िंदगी ना तबाह करो”"

By | 2017-09-27T07:12:53+00:00 September 27th, 2017|Mirza Ghalib|0 Comments