तेरी यादों के जो आखिरी थे निशान, दिल तड़पता रहा, हम मिटाते रहे

" “तेरी यादों के जो आखिरी थे निशान, दिल तड़पता रहा, हम मिटाते रहे... ख़त लिखे थे जो तुमने कभी प्यार में, उसको पढते रहे और जलाते रहे....”"

By | 2017-09-26T12:38:17+00:00 September 25th, 2017|Gulzar|0 Comments

ग़म मौत का नहीं है

" ग़म मौत का नहीं है, ग़म ये के आखिरी वक़्त भी तू मेरे घर नहीं है.... निचोड़ अपनी आँखों को, के दो आंसू टपके.. और कुछ तो मेरी लाश को हुस्न मिले..... डाल दे अपने आँचल का टुकड़ा... के मेरी मय्यत पे कफ़न नही है............"

By | 2017-09-25T07:19:41+00:00 September 25th, 2017|Gulzar|0 Comments