बेबस निगाहों में है तबाही का मंज़र

" बेबस निगाहों में है तबाही का मंज़र, और टपकते अश्क की हर बूंद वफ़ा का इज़हार करती है........ डूबा है दिल में बेवफाई का खंजर, लम्हा-ए-बेकसी में तसावुर की दुनिया मौत का दीदार करती है.......... ऐ हवा उनको कर दे खबर मेरी मौत की... और कहेना, के कफ़न की ख्वाहिश में मेरी लाश उनके [...]

By | 2017-09-25T09:38:13+00:00 September 25th, 2017|Gulzar|0 Comments