दिल की धड़कन को एक लम्हा सब्र नहीं शायद उसको अब मेरी ज़रा भी कद्र नहीं

“दिल की धड़कन को, एक लम्हा सब्र नहीं,
शायद उसको अब मेरी ज़रा भी कद्र नहीं,
हर सफर में मेरा कभी हमसफ़र था वो,
अब सफर तो है मगर वो हमसफ़र नहीं।”

By | 2017-09-09T07:19:27+00:00 September 9th, 2017|Intezaar Shayari|0 Comments