तबीअत अपनी घबराती है जब सुनसान रातों में

“तबीअत अपनी घबराती है जब सुनसान रातों में

हम ऐसे में तिरी यादों की चादर तान लेते हैं “

By | 2017-09-25T06:24:49+00:00 September 25th, 2017|Firaq Gorakhpuri|0 Comments