जितने गदा-नवाज़ थे कब के गुज़र चुके

“जितने गदा-नवाज़ थे कब के गुज़र चुके
अब क्यूँ बिछाए बैठे हैं हम बोरिया न पूछ”

By | 2017-09-26T08:48:33+00:00 September 26th, 2017|Josh Malihabadi|0 Comments