कोई हस्ती कोई मस्ती

“कोई *’हस्ती’* कोई *’मस्ती’*
कोई *’चाह’* पे मरता है..
कोई *’नफरत’* कोई *’मोहब्बत’*
कोई *’लगाव’* पे मरता है..
ये *””देंश””* है उन *’दिवानों’* का
यहां हर बन्दा
अपने *””हिंदुस्तान””* पे मरता है..”

By | 2017-12-06T11:53:33+00:00 December 6th, 2017|Republic Day Shayari|0 Comments